"वीर–कामना: समझ का पहला स्पर्श"
(अद्भुत रोमांटिक कहानी सीरीज – भाग 1)
अपने पिछले प्यार की नाकामी से उबर कर ज़िंदगी को पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा था वीर, कि उसकी ज़िंदगी में ताज़ी हवा के झोंके की तरह कामना का आगमन हुआ।
कामना बस यूँ ही उसे पसंद करने लगी थी, पर वीर वापिस प्यार में नहीं पड़ना चाहता था, इसलिए वह उससे दूर ही रहने की कोशिश करता। कामना समझ रही थी, इसलिए उसने कभी वीर पर अधिकार जताने की कोशिश न की, पर उसे ख़ुद की भावनाओं पर भरोसा था इसलिए वीर के प्रति अपने प्यार को दर्शाने में कभी कंजूसी भी न की। जब तब वह अपनी बातों में उससे कह देती कि उसे वीर से प्रेम है।
एक दिन वीर ने चिढ़कर कह दिया, “नहीं समझ आता मुझे तुम्हारा प्यार!”
कामना ने शांति से पूछा, “न समझ आए, पर यह तो समझ आता है ना कि मुझे तुमसे प्यार है?”
“हाँ, आता है,” वीर ने सिर हिलाकर मौन सहमति दे दी।
वीर अक्सर अपनी कमियाँ, बुराइयाँ, ग़लत आदतें ढूँढ–ढूँढ कर कामना को बताता। कामना सब मुस्कुरा कर सुन लेती।
इसी बीच वीर के एक पुराने दोस्त ने अपने कुछ ख़ास दोस्तों को अपने जन्मदिन के लिए पहाड़ के किसी सुदूर हिस्से में चलने की दावत दी।
दो-तीन दिन बाद वीर ने अपनी कुछ फ़ोटो कामना को भेजीं। फ़ोटो सभी बहुत सुंदर थीं – कहीं हरियाली, कहीं फूल, कहीं सूर्योदय और सूर्यास्त, कहीं पहाड़ का कठिन जीवन। एक तस्वीर में वीर बाएँ हाथ में हुक्का लिए है, सीधे हाथ से उसने हुक्के की नली पकड़ी है और उसे मुँह तक ले गया है। पास में ही एक बुज़ुर्ग पहाड़ी वेशभूषा में बैठे हैं, उनके चेहरे पर मुस्कान है और वे वीर को देख रहे हैं। वीर की पलकें झुकी हुई हैं और वह हुक्का पी रहा है।
कामना को पता था कि वीर सिगरेट पीता है, पर अब हुक्का...!! उसका दिल टूट गया... आँखों से बरबस आँसू बह निकले। उसने उस फ़ोटो को तीस-चालीस बार देखा और हर बार अपने आँसुओं को न रोक सकी। उसने सोचा कि वीर को हुक्का पीने से मना करे, पर कुछ भी कह न सकी...।
सारा दिन वह तस्वीर उसके दिल-दिमाग़ में हलचल मचाती रही। फिर अचानक उसे कुछ ख़्याल आया, उसने फिर फ़ोटो को ध्यान से देखा और उसे वीर पर और प्यार आने लगा। उसकी सारी उदासी छू-मंतर हो गई। वह वीर की वापसी का बेचैनी से इंतज़ार करने लगी।
दो दिन बाद वीर आया और कामना से मिला। कामना ने उसकी यात्रा के बारे में जाना, पर उस हुक्के वाली तस्वीर के विषय में कुछ न कहा।
वीर ने पूछा, “तुम्हें कुछ और नहीं जानना है?”
“नहीं...!”
“क्यों?”
“क्या बताना चाहते हो?”
“मैंने हुक्का पिया!” कहते हुए वीर की नज़रें झुक गईं।
“वीर, जब हम किसी से प्यार करते हैं ना, तो उसके सम्पूर्ण रूप से करते हैं, और कमियाँ किसमें नहीं होतीं। एक बात तुमने बताई, एक मैं बताती हूँ...”
वीर आश्चर्य चकित होकर देख रहा था।
“वीर, किसी का सम्मान करने के लिए या किसी के प्रति प्यार दर्शाने के लिए, एक थाली में खाना या एक ही हुक्के से पीना स्वाभाविक है। तुम सुदूर पहाड़ की यात्रा पर गए थे, तुम्हारे साथ कोई बुज़ुर्ग व्यक्ति बैठे हैं, और वे बड़े प्रेम से तुम्हारी तरफ़ देख रहे हैं। वे शायद परिवार के मुखिया या तुम्हारे मित्र के पिता हो सकते हैं, जिनके सम्मान के लिए एक ही हुक्के से पीने का रिवाज तुम निभा रहे हो। तुमने ध्यान दिया होगा कि उस हुक्के में स्टैंड नहीं लगा है यानी वह हाथों में ही उठा रखना होता है ताकि जितने लोग वहाँ बैठे हैं सब उसे पीएँ और बराबरी महसूस करें।”
वीर की हैरानी का ठिकाना न था।
“तुम कई बार अपनी कमियाँ मुझे जानबूझकर बताते रहते हो। ये तस्वीर भी तुमने जानबूझकर भेजी, ताकि मैं तुमसे दूर हो जाऊँ। मैं कैसे तुमसे दूर रह सकती हूँ वीर, जबकि उस समय की परंपरा का ख़्याल रखते हुए, सबका साथ देने के लिए तुमने हुक्का पकड़ा तो, पर पिया नहीं...!!”
“तुम कैसे कह सकती हो ये बात?”
“तुम्हारी झुकी नज़र ने यह राज़ खोला। तुम उस पल का मज़ा लेते हुए नहीं दिख रहे हो, न तुम्हारे हाव-भाव से किसी तरह का गर्व, स्टाइल या एटिट्यूड झलक रहा है। तुम तो बस परिस्थिति के अनुरूप व्यवहार करते दिख रहे हो, वीर! ये है तुम्हारी तस्वीर का सच, जो मैं समझी। एक तस्वीर तुमने दिखाई और एक मैंने। जो बंदा समयानुकूल व्यवहार करे वह ग़लत या बुरा कैसे हो सकता है वीर...!! मैं तुम्हें सही समझ रही हूँ ना...?” कामना ने अपनी नज़रें वीर पर टिकाईं।
वीर के पास हैरानी भरी मौन स्वीकृति के अलावा कुछ कहने को नहीं था।
इतनी गहराई से समझने वाली, सुलझी कामना को वीर ने अचानक गले लगा लिया। कामना उस स्पर्श से रोमांचित हो गई। उसे सचमुच अपने प्यार पर भरोसा था।
ये दोनों के प्यार की नई शुरुआत थी...
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